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कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए अन्य जिलों से आने वाले हर व्यक्ति की राजधानी की सीमा पर कोरोना टेस्ट का प्रस्ताव प्रशासन ने खारिज कर दिया है। प्रस्ताव सीएमएचओ ने दिया था, ताकि सीमा पर जांच के बाद निगेटिव लोगों को एंट्री दी जा सके, जिससे राजधानी में कोरोना का फैलाव न हो।

यही नहीं, दूसरे जिले का जो व्यक्ति सीमा पर पाजिटिव पाया गया, उसके इलाज का भी वहीं इंतजाम हो जाए, ताकि उसके कारण उसके परिवार और आसपास संक्रमण न फैले। प्रशासन ने जांच की वजह से राजधानी की हर सीमा पर लंबे जाम और लाइन की आशंका को देखते हुए यह प्लान कैंसिल किया है। माना जा रहा है कि सीमा पर इतनी भीड़ और जाम की वजह से संक्रमण और फैलता, इसे भी ध्यान में रखा गया है।

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अब प्रयोग के तौर पर कुम्हारी नाके के पास अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों पर सवाल लोगों की ही एंटीजन जांच सोमवार से शुरू होगी। अफसरों के मुताबिक राजधानी की सीमा पर अब छत्तीसगढ़ की नंबर प्लेट वाली गाड़ियों में सवार लोगों को जांच से मुक्त रखा जाएगा। फिलहाल एक टीम कुम्हारी नाके के पास तैनात होगी। इसके बाहर अन्य राज्यों की गाड़ियों की जांच के लिए दो-तीन और एंट्री प्वाइंट पर टीमें रखी जाएंगी।

गौरतलब है, गुरुवार को ही सीएमएचओ ने रायपुर कलेक्टर को शहर के सभी एंट्री प्वाइंट पर टीमें तैनात कर हर आने वाले व्यक्ति के एंटीजन टेस्ट का प्रस्ताव दिया था। गुरुवार की रात प्रशासन ने इसे मंजूरी भी दी, लेकिन विचार-विमर्श और कई तरह की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार को इसे रद्द किया गया और तय हुआ कि केवल बाहरी राज्यों की गाड़ियों को ही जांच के दायरे में लेंगे, वह भी प्रयोग के तौर पर केवल एक चौराहे पर ही। सीएमएचओ डॉ. मीरा बघेल ने प्लान बदलने की पुष्टि की और कहा कि लोगों की दिक्कत न आए, इसलिए योजना फिलहाल रद्द की गई है।

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बाहरी गाड़ियों के लोगों की जांच भी सिर्फ सहमति से

कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के नंबर प्लेट वाले वाहनों को मुक्त रखा जाए और दूसरे राज्यों से आने वाले गाड़ियों में सवार लोगों की ही जांच की जाए। हालांकि हर आने वाले व्यक्ति के लिए यह जांच अनिवार्य नहीं है। जिसमें लक्षण होंगे और जो लोग सहमति देंगे, उन्हीं का सैंपल लिया जाएगा, बाकी का नहीं।

इनमें दूसरे राज्यों से आने वाले ट्रक व कामर्शियल वाहनों के साथ कारें वगैरह भी शामिल हैं। सीएमएचओ ने बताया कि सोमवार से कुम्हारी टोल नाका टाटीबंध चौक के पास एक हेल्थ टीम तैनात की जा रही है। यह प्रयोग के तौर पर पहला टेस्टिंग प्वाइंट होगा। वहां बेहतर रिस्पांस मिला तो कुछ और एंट्री प्वाइंट पर ऐसी टीमें तैनात रहेंगी।

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एक गाड़ी को पास करने में लगता आधा घंटा

हेल्थ अफसरों ने माना कि किसी भी एंट्री प्वाइंट पर अगर एक कार में पांच लोग होते तो हर किसी की जांच में पांच-पांच मिनट लगते ही। अर्थात, कोई भी गाड़ी आधा घंटे से कम समय में पास नहीं हो पाती। इस वजह से राजधानी आने वाली हर सड़क पर कई-कई किमी की लाइन लगती। इसमें वह लोग फंसते तो नौकरी, रोजगार या सामान खरीदने के लिए राजधानी आते-जाते रहते हैं।

राजधानी में भिलाई-दुर्ग, भाटापारा-बिलासपुर, राजनांदगांव, बेमेतरा, गरियाबंद, सरायपाली, महासमुंद और धमतरी समेत कई जगहों से रोजाना लगभग दो लाख लोग आना-जाना करते हैं। यही नहीं, सैकड़ों लोग इलाज के लिए अन्य जिलों से आते हैं। यह सभी मुसीबत में आ जाते, इसलिए प्लान बदलना पड़ा।

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