रायपुर। कोरोना संक्रमितों के टीकाकरण के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी की है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार कोविड-19 पीड़ित व्यक्तियों को उनके स्वस्थ होने के तीन माह बाद कोरोना से बचाव का टीका लगाया जाना है। यह गाइडलाइन स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60 वर्ष से अधिक के लोगों को लगाए जा रहे प्रिकॉशन डोज के साथ ही सभी आयु वर्ग के टीकाकरण के लिए प्रभावी होगा।

छत्तीसगढ़ में तीसरी लहर के दौरान पहली बार एक दिन में 15 मरीजों की मौत से मचे हड़कंप के बीच बदलाव शुरू हो गए हैं। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग का प्रमुख सचिव बदल दिया है। डॉ. आलोक शुक्ला की जगह पर डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी अब स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगी। इस बीच कोरोना से हुई मौतों की पड़ताल शुरू हुई है। विभाग ने कोरोना से मरने वालों में किसी नए वैरिएंट की आशंका को देखते हुए जांच कराने का फैसला किया है।

बताया जा रहा है, कोरोना से मरने वालों के नमूनों में से रैंडमली 5% को जीनोम सीक्वेसिंग के लिए भुवनेश्वर भेजा जाएगा। इसके जरिए यह जानने की कोशिश हो रही है कि कोई वैरिएंट कितना घातक है। सामान्य रूप से हो रही जांच में से 5% सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए पहले भी भेजे जा रहे हैं। अभी तक करीब सवा चार हजार नमूने भुवनेश्वर भेजे जा चुके हैं।

इसमें प्रमुख रूप से डेल्टा, बी-1, बी-617, बी-671.2, बी-1617.2, काप्पा, यूके और ओमिक्रॉन वैरिएंट शामिल हैं। तीसरी लहर के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे ओमिक्रॉन वैरिएंट के 21 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन ये सभी लोग पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जीनोम सीक्वेंसिंग के नतीजों से यह पता चलेगा कि कौन सा वैरिएंट अधिक मौत की वजह बन रहा है। यहीं नहीं मरीज को संक्रमण की वजह से हुई दिक्कतों और मौत के कारणों को समझने में भी आसानी होगी। प्रदेश में अब तक 13 हजार 705 मरीजों की जान इस महामारी की वजह से जा चुकी है।