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  • Rise in death ratio due to covid-19 in Raipur

कोरोना की दूसरी लहर का असर दिख रहा है। ऐसे में एक रिपोर्ट जारी हुई है, जो यह बतलाती है कि कोरोना से मरने वालों में 60 फीसदी ऐसे लोग थे, जिन्हें कोरोना के लक्षण थे पर उन्होंनेे जांच देरी से कराई। राजधानी में यह आंकड़ा 92 प्रतिशत का है। देखने में यह आ रहा है कि हम बेपरवाह हो रहे हैं।

प्रदेश में 60% कोरोना मरीजों की मौत की वजह देरी से जांच व इलाज

प्रदेश में 60 फीसदी कोरोना मरीजों की मौत जांच में देरी की वजह से हो रही हैं। जांच में देर होने से पॉजिटिव होने का देरी से पता चलता है। कारण मरीज का इलाज देर से शुरू हुआ। अस्पताल पहुंचने के दौरान गंभीर भी रहे। इसलिए मरीजों की मौत हो गई। डेथ ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

हर सप्ताह कमेटी की होने वाली बैठक में मरीजों की मौत की समीक्षा की जा रही है। डेथ ऑडिट कमेटी की समीक्षा के दौरान ये बात भी सामने आई कि कुछ मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिली। कुछ मरीजों को अस्पताल में वेंटीलेटर नहीं मिला। ऐसे जिलों के कलेक्टरों को व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कहा जा रहा है। ताकि गंभीर मरीजों के इलाज में कोई दिक्कत न हो।

“ज्यादातर मरीजों की मौत समय पर जांच न कराने के फलस्वरूप देरी से इलाज के कारण हुई। लोगों ने लक्षण के बावजूद जांच नहीं करवाई तथा वे गंभीर हुए। जहां मरीजों को एंबुलेंस व ऑक्सीजन नहीं मिली, उन जिलों के कलेक्टरों को व्यवस्था में सुधार लाने को कहा जा रहा है।”
डॉ. सुभाष पांडेय, मीडिया प्रभारी स्टेट कोरोना सेल

“लक्षण के बावजूद लोगों की लापरवाही भारी पड़ रही है। जांच के लिए ऐसे बहुत से लोग आ रहे हैं, जिन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। सांस लेने में तकलीफ का इंतजार क्यों करना। पहले जांच करवा लें तो यह समस्या ही नहीं आएगी। मरीज इलाज के बाद भी ठीक होने लगेगा।”
-डॉ. विष्णु दत्त, डीन नेहरू मेडिकल कॉलेज

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कोरोना डेथ ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा –

केस – 01 

महासमुंद निवासी 51 वर्षीय कारोबारी को 14 अक्टूबर से हल्का बुखार शुरु हुआ। वे 19 अक्टूबर को निजी डॉक्टर के पास पहुंचे। वहीं से दवा ली। 23 को उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। 25 को उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया। उसके बाद सैंपल लिया गया और 27 अक्टूबर को रिपोर्ट उनकी पॉजिटिव आई। फिर वे होम आइसोलेशन में रहे। स्थिति बिगड़ने पर 2 नवंबर को एम्स में भर्ती कराया गया। 9 को मौत हो गई।

केस – 02 

भिलाई निवासी 65 वर्षीय महिला को सर्दी, खांसी व बुखार था। एक-दो दिन मेडिकल स्टोर से दवा लेकर काम चलाया। सांस लेने में दिक्कत होने पर वहीं के झोला छाप डॉक्टर को दिखाया। स्थिति और बिगड़ी तो उन्हें अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जब वे भर्ती हुईं तो फेफड़े में इंफेक्शन फैल चुका था। इलाज के दो दिन बाद उनकी मौत हो गई।

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मौत की तीन अहम् वजह

  • मरीज लक्षण के बावजूद जांच नहीं करा रहे और परिजनों के बीच रहे।
  • दूसरा समय पर एंबुलेंस नहीं मिली और मरीज देरी से अस्पताल पहुंचा।
  • मरीज को ऑक्सीजन व वेंटीलेटर की सुविधा नहीं मिली।

रायपुर में 636 लोगों की मौत, 76% काे पहले से थी कोई न कोई बीमारी

राजधानी और लगे इलाकों में कोरोना से पिछले छह माह में 636 लोगों की जान गई। इनमें से 92 प्रतिशत ने कोरोना जांच करवाने में ही देर कर दी। कुल मौतों में से 76 फीसदी लोग ऐसे थे, जिनकी किसी न किसी बड़ी बीमारी की दवा चल रही थी।

इसके बावजूद उन्होंने सर्दी-खांसी और बुखार होने पर कोरोना टेस्ट करवाने के बजाय अपने डाक्टर या मेडिकल स्टोर वालों से पूछकर दवाइयां खाईं और समस्या बढ़ गई। मौतों के ऑडिट में यह पता किया जा रहा है कि मौत की वजह क्या था? जांच में यह बात सामने आई कि मरनेवालों में 585 लोग (92 प्रतिशत) में लक्षण के बाद भी टेस्ट करवाने में देरी हुई।

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लक्षण होने पर तत्काल टेस्ट कराएं, तभी बचेंगे

“जिले में कोरोना से हुई कुल मौत का ऑडिट कराया जा रहा है, अभी तक जो सामने आया कि लक्षण के बाद भी टेस्ट में देरी की गई। ऐसे मामले शहरी क्षेत्र में ज्यादा दिखे, जहां दुकानों से दवा लेकर प्रयोग किया जाता रहा। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें, तत्काल टेस्ट कराएं, उससे ही गंभीर स्थिति में जाने से बच सकते हैं।”
-डॉ. मीरा बघेल, सीएमएचओ रायपुर

केस – 01 

11 दिन बाद गए अस्पताल
राजधानी के राजातालाब एरिया की 77 वर्षीय महिला की मृत्यु 2 नवंबर को हुई। ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि महिला को 27 सितंबर से कोरोना के लक्षण थे। वह बीपी की मरीज थीं, इसके बावजूद 6 अक्टूबर को 11 दिन बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिर हालत नहीं सुधरी।

केस – 02

मेडिकल से लेते रहे दवा
डंगनिया कॉलोनी के 73 साल के व्यक्ति की मृत्यु 15 नवंबर को हुई। ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक इन्हें 8 नवंबर से ही बुखार व सांस लेने में तकलीफ थी। वे हार्ट और बीपी के भी पेशेंट थे। बुखार के लिए वे मेडिकल स्टोर्स से दवा लेते रहे। इन्हें 15 तारीख को ही भर्ती कराया गया था।

केस – 03

शुगर पेशेंट, 15 दिन से कमजोरी

सरोरा की 46 साल की शुगर पेशेंट महिला की मौत कोरोना से 11 नवंबर को हुई। जांच टीम को पता चला कि उसे 8 नवंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि इसके 15 दिन पहले से उन्हें कमजोरी लग रही थी, बुखार भी था। इसके बाद भी टेस्ट व इलाज में देरी से हालत बिगड़ गई।

ये है जांच के नतीजे –

  • 636 – मौंतें हुई
  • 454 – पुरुष
  • 182 – महिलाएं
  • 484 यानी 76% मरीज को पुुरानी बीमारियां थीं।
  • 527 को यानी कि 83 फीसदी को लक्षण थे।

रायपुर में 166, प्रदेश में 1842 नए मरीज, 19 मौतें, एक्टिव 19817 केस

कोरोना के प्रदेश में शुक्रवार को 1842 और रायपुर में 166 नए संक्रमित मिले हैं। रायपुर में दो समेत 19 मरीजों की मौत भी दर्ज की गई। नई मौतों के साथ ही प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,692 हो गई है। रायपुर में मरने वालों का आंकड़ा 639 पहुंच चुका है। प्रदेश में अब तक 2 लाख 19 हजार 404 पॉजिटिव हो चुके हैं। एक्टिव केस 19,817 हैं।

रायपुर में मरीजों की संख्या 44,297 है। 7,213 लोगों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों व घरों में चल रहा है। दिवाली के बाद राजधानी समेत प्रदेश में मरीजों की संख्या में खासी बढ़ोत्तरी हुई है। दिवाली पर्व के तीन दिनों में शनिवार, रविवार व सोमवार को प्रदेश में 2,356 व रायपुर में केवल 221 मरीज मिले थे।

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शनिवार को प्रदेश में 716, रविवार को 530 व सोमवार को 1110 मरीज मिले। राजधानी में शनिवार को केवल 92, रविवार को 50 व सोमवार 79 मरीज मिले। शनिवार को जब 716 संक्रमित आए, तब 9147 सैंपलों की रिपोर्ट आई थी। यानी जांच कराने वाला हर 13वां व्यक्ति पॉजिटिव मिला। रविवार को 8005 सैंपलों में केवल 530 पॉजिटिव आए।

यानी हर 15वां व्यक्ति कोरोना संक्रमित निकला। सोमवार के बाद राजधानी समेत प्रदेश में मरीजों की संख्या में एकाएक बढ़ोतरी शुरू हो गई है। प्रदेश में पिछले दो दिनों से रोज औसतन 2 हजार व राजधानी में 200 से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार दिवाली कारण वायरोलॉजी लैब से लेकर ट्रू नाॅट व एंटीजन किट से जांच कम हुई। त्योहारी माहौल के कारण लोग भी कम सैंपल देने निकले।

अब लोग लक्षण दिखने पर सैंपल देने सेंटरों में पहुंच रहे हैं। कोरोना कोर कमेटी के सदस्य डॉ. आरके पंडा ने बताया कि त्योहार के कारण पॉजिटिव केस कम आए थे। सोमवार से सैंपलों व जांच की संख्या बढ़ी है। जो लोग सैंपल नहीं दे रहे थे, वे भी दे रहे हैं। इसलिए पॉजिटिव केस की संख्या बढ़ रही है।