सिटी न्यूज रायपुर –

15/10/2020

7 अक्टूबर की रात 12 बजे भीमराव अंबेडकर अस्पताल रायपुर में मरीज की मौत हो गई थी। लेकिन 12 अक्टूबर तक इसकी जानकारी परिजनों को नहीं दी गई। जबकि परिजन 7 अक्टूबर से उससे संपर्क करने मोबाइल काल कर रहे थे। 11 अक्टूबर जब उसे रायपुर रेफर करने की जानकारी दी गई तब परिजन डाॅक्टरों के पास पहुंचे। जहां कभी रायपुर तो कभी जगदलपुर रेफर करने की जानकारी देते रहे। जबकि 7 अक्टूबर को ही मरीज की मौत हो चुकी थी। 12 अक्टूबर को इसका खुलासा हुआ और 13 अक्टूबर को शव गांव लाया गया।

कांकेर 15 अक्टूबर 2020 chhattisgarh.co :-कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत और 7 दिन बाद उसकी लाश परिवार को मिलने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। परिजनों के अनुसार जब मरीज की लाश को दिखाया गया तो उसमें कीड़े बिलबिला रहे थे। परिजनों का आरोप है कि लाश को देखने से ऐसा लग रहा है कि उसे मरच्यूरी में न रख उसे कहीं दफना दिया गया था। जब हंगामा हुआ तो उसे वापस कब्र खोद कर निकाल गांव लाया गया। तारसगांव निवासी कोरोना पॉजिटिव प्रतापराम वारदे की लाश 13 अक्टूबर की शाम 6 बजे रायपुर गांव लाई गई। शाम 7.30 बजे लाश को अंतिम संस्कार करने नदी के तट पर ले जाया गया। जहां मृतक के पुत्र व कुछ लोगों को पालीथीन के बैग में बंद लाश का चेहरा पारदर्शी झिल्ली की ओर से दिखा उसकी शिनाख्त भी कराई। लेकिन इन 6 दिन में लाश इतनी सड़ चुकी थी कि उसमें कीड़े लग चुके थे। शव पाॅलीथिन में पैक होने के बावजूद उससे उठ रही दुर्गंध से वहां खड़ा होना मुश्किल हो रहा था। इसके बाद प्रशासन की उपस्थिति में कोरोना पॉजिटिव मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक के बेटे सिकंदर वारदे ने कहा कि लाश में कीड़े लग चुके थे। चेहरे पर कीड़े बिलबिला रहे थे। ऐसा लग रहा था कि शव को पहले कहीं दफना दिया गया था। पुत्र का आरोप है कि जब पिता जी की जानकारी जुटाई गई तो स्वास्थ्य विभाग अपनी गलती छिपाने लाश को दोबारा कब्र खोद कर बाहर निकाल गांव लेकर आया है। मृतक की बहू मिथलेश्वरी वारदे ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते कहा शव को इतने दिन तक कहां रखा गया था यह पूरी बात सामने आनी चाहिए। यदि मरच्यूरी में रखा गया था तो शव कैसे सड़ गया। इसमें जो भी दोषी है उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

7 तारीख को रायपुर में मौत पर सूचना नहीं दी
तारसगांव कोरोना पॉजिटिव प्रताप राम वारदे को 6 अक्टूबर को इलाज के लिए जिला अस्पताल कांकेर लाया गया था। जांच में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद कोविड अस्पताल कांकेर भेज दिया गया था। स्थिति गंभीर होने पर 6 अक्टूबर को ही मरीज को रायपुर रेफर किया गया। 7 अक्टूबर की रात 12 बजे भीमराव अंबेडकर अस्पताल रायपुर में मरीज की मौत हो गई थी। लेकिन 12 अक्टूबर तक इसकी जानकारी परिजनों को नहीं दी गई। जबकि परिजन 7 अक्टूबर से उससे संपर्क करने मोबाइल काल कर रहे थे। 11 अक्टूबर जब उसे रायपुर रेफर करने की जानकारी दी गई तब परिजन डाॅक्टरों के पास पहुंचे। जहां कभी रायपुर तो कभी जगदलपुर रेफर करने की जानकारी देते रहे। जबकि 7 अक्टूबर को ही मरीज की मौत हो चुकी थी। 12 अक्टूबर को इसका खुलासा हुआ और 13 अक्टूबर को शव गांव लाया गया।

 

सिटी न्यूज रायपुर…