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छत्तीसगढ़ के पूर्व भाजपा विधायक देवजी भाई पटेल ने कांग्रेस के 8 विधायकों को नोटिस जारी किया है। इसमें अनीता शर्मा विधायक धरसीवा, इंद्रशाह मंडावी विधायक मोहला मानपुर, पारसनाथ राजवाड़े विधायक भटगांव, चंद्र देव राय विधायक बिलाईगढ़, गुलाब कमरों विधायक भरतपुर सोनहत, मोतीलाल विधायक पालीताना खार, गुरु दयाल सिंह बंजारे विधायक नवागढ़, विनय जायसवाल विधायक मनेंद्रगढ़ के नाम शामिल हैं।

देवजी भाई ने दावा किया है कि इन विधायकों ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि देवजी भाई पटेल पूर्व विधायक और अशोक चतुर्वेदी तत्कालीन महाप्रबंधक पाठ्य पुस्तक निगम के साथ भ्रष्टाचार में शामिल थे । इस पर देवजी ने कहा कि मुझे किसी शासकीय अधिकारी के संबंध में पक्ष अथवा विपक्ष में कोई बात नहीं कहनी है । पर इन आठों विधायकों से मैंने कुछ सवाल पूछे हैं अगर वो इन सवालों का जवाब 21 दिनों में नहीं देते तो हर एक पर 5 करोड़ के मानहानि का मुकदमा ठाेकूंगा।

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देवजी भाई के सवाल

– कांग्रेस के विधायक कह रहे हैं कि अशोक चतुर्वेदी को पाठ्य पुस्तक निगम में प्रबंध संचालक बनाया गया था, वे साबित करे कि अशोक चतुर्वेदी प्रबंध संचालक थे ? मेरे कार्यकाल में अशोक चतुर्वेदी कभी भी प्रबंध संचालक नहीं थे, शिकायत पूर्णत: आधारहीन है।

– विधायकों की शिकायत के अनुसार अशोक चतुर्वेदी की पाठ्य पुस्तक निगम में महाप्रबंधक पद पर पदस्थापना नियम के विरुद्ध की गई । अशोक चतुर्वेदी को द्वितीय श्रेणी के अधिकारी बताया गया है, अतः वे इस तथ्य को समक्ष रखें कि वे द्वितीय श्रेणी के अधिकारी थे तथा यह साबित करें कि उक्त आदेश को मेरे पहुंच से जारी किया गया है।

– यह तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत करें कि देवजी भाई पटेल ने कितने करोड़ का भ्रष्टाचार किया ? और शासन को कितने करोड़ की क्षति पहुंचाई ? कैसे तथा किन-किन व्यक्ति द्वारा कब-कब कितनी राशि दी गई ? एवं भ्रष्टाचार की राशि का आदान-प्रदान हुआ है ।

– विधायकगण तथ्यात्मक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें कि अशोक चतुर्वेदी द्वारा चुनावी फंड की राशि देवजी भाई पटेल को दी गई है कब-कब किन-किन चुनाव में ?

– अशोक चतुर्वेदी से मेरा कोई सरोकार नहीं है , आर्थिक लेन देन कब कैसे किया गया ? विगत 15 वर्ष का मेरे खातों का एवं अशोक चतुर्वेदी के खातों की जांच कर ली जाए इसका तथ्यात्मक जवाब विधायकगण देवें ?

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जानिए क्या ये है पूरा मामला ….

छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम को प्राइमरी, मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों के बच्चों के लिए किताबों के प्रकाशन और विक्रय से मिलने वाले लाभांश का इस्तेमाल बच्चों के शैक्षणिक गुणवत्ता पर खर्च करना होता है। मगर यह बातें सामने आईं कि तैनात अधिकारियों ने इस लाभांश को अपने लोगों को स्वेच्छानुदान के रूप राशि बांट दी। महज सादे कागज पर ली गई अर्जी के आधार पर इलाज, आर्थिक मदद या निजी सामग्री खरीदने के नाम पर करोड़ों रुपये जारी कर दिए गए।

इस पर विधायक अनिता शर्मा ने सोनिया गांधी को एक खत लिखा था। सोनिया गांधी को लिखे पत्र में अनिता शर्मा आरोप लगाया है कि अशोक चतुर्वेदी के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम में करोड़ाें का भ्रष्टाचार हुआ। टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता हुई। ब्लैक लिस्टेड फर्मों को काम दिया गया। स्वेच्छानुदान के नाम पर लाखों रुपये अपात्रों को दे दिये गये, जिनका शैक्षणिक उन्नयन से कोई संबंध ही नहीं था। उनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो में मामला दर्ज है।