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बारिश के साथ ही जिले के 8 रेत घाट बंद कर दिए हैं। इसी के साथ अब राजधानी में यह कारोबार रेत सिंडीकेट के हाथों में चला गया है। इस वजह से तीन दिन में ही एक हाईवा रेत का रेट 6500 रुपए से बढ़कर 10 हजार रुपए तक पहुंच रहा है। सिंडीकेट ने यही मुद्दा बनाया है कि जिले के रेत घाट बंद हो गए हैं, इसलिए दूर से रेत आ रही है। इससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च काफी बढ़ गया है।

राजधानी मेंं ही 1500 से 2000 ट्रक रेत की खपत रोजाना होती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिला खनिज विभाग की ओर से हर साल की तरह इस साल भी खुली जगहों पर रेत डंप (इकट्‌ठा) करने के लिए लाइसेंस जारी किए गए हैं। पिछले साल जहां 10 से 12 ही लाइसेंस जारी किए गए थे, लेकिन इस साल इसकी संख्या 25 से ज्यादा है। इन सभी को एक और दो साल के लिए अस्थायी लाइसेंस जारी किए गए हैं।

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पिछले साल रेत की कीमत बहुत बढ़ी थी यही वजह है कि इस बार रेत डंप करने वालों ने बड़ी संख्या में लाइसेंस लिए हैं। रेत सप्लायर इनसे भी रेत की खरीदी करते हैं। शहर के पास ही रेत डंप होने के बावजूद लाइसेंस वाले अपनी मनमर्जी से रेत की बिक्री करते हैं। बहरहाल, रेत की बढ़ती कीमत के बाद कई कंस्ट्रक्शन साइट पर काम धीमा हो गया है। खासतौर पर उन जगहों पर जहां प्लास्टर का काम होना है। क्योंकि अभी जो रेत की सप्लाई हो रही है वह बारिक की जगह मोटी है।

मजबूरी में सरकारी, प्राइवेट और बड़े बिल्डर भी इसी रेत का उपयोग कर रहे हैं। बताया गया है कि रेत डंप करने वालों को भी प्रशासन की ओर से तय कीमत पर रेत की बिक्री करनी होती है। यानी एक हाइवा की कीमत किसी भी परिस्थिति में 6000 से ज्यादा नहीं हो सकती। इसके बावजूद रेत 10 हजार रुपए से ज्यादा में बेची जाती है। प्रशासन के पास रेत डंप करने वालों की जांच करने का कोई सिस्टम ही नहीं है। उल्लेखनीय है कि पूर्व मंंत्री धनेंद्र साहू ने रेत भंडारण की जांच की मांग करते हुए संचालक को पत्र लिखा है।

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