सिटी न्यूज रायपुर –  राजधानी रायपुर में पुछो तो सब कहते है कि कोरोना से बचना है, मास्क नाक के जगह हाथ में पकडे रहने वाले भी कहते है कि कोरोना से बचना है लेकिन लोगो में लापरवाही इतना अधिक है कि ना तो सोशल दूरी और ना ही मास्क का उपयोग कर रहे है,  यही कारण है कि आज कोरोना खतरनाक स्टेज पर पहुंच चुका है ,  केवल वही लोग सावधानी बरत रहे हैं जो पढे लिखे है , समझदार है ..या फिर जिसके घर – परिवार , पडोस या दोस्त को कोरोना हुवा हो और उनकी परेशानियों को नजदीक से देखा हो ….!!

रायपुर। जिले में कोरोना संक्रमण से बचाव के मामले में स्थिति सुधरने की बजाय बिगड़ती ही जा रही है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अमला प्रयास जरूर कर रहा है, लेकिन हालात सुधर नहीं रहा है। कोरोना संक्रमित मरीजों के मिलने का ग्राफ दिनोदिन बढ़ रहा है। सड़क, बाजार और कॉलोनियों की हालत देखकर विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। इनका मानना है कि कोरोना से बचने के लिए लोग खुद की जिम्मेदारियों को भूल चुके हैं। कोई मास्क लगाने में ऐतराज करता है, तो कोई सोशल डिस्टेंसिंग को समझने की कोशिश तक नहीं करता है। हालात ऐसे हैं कि हर कोई सरकार से उम्मीदें कर रहा है, लेकिन अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान नहीं दे रहा है।

कोरोना मरीज 25 हजार के करीब…

रायपुर जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा २५ हजार के करीब पहुंच गया है, जिसमें १२ हजार से अधिक एक्टिव केस हैं,  राजधानी में मरीज बढ़ रहे हैं, तो जांच भी तीन गुने रफ्तार से बढ़ रही है। लेकिन, सरकार के यह प्रयास तब तक सफल नहीं होंगे, जब तक आम व्यक्ति इसमें अपना सहयोग नहीं करेगा। लोगों का कोरोना के प्रति डर खत्म हो रहा है। बाजार या घर के बाहर लोग पहले की तरह भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में घुसते ही जा रहे हैं। किसी के चेहरे पर मास्क है तो किसी की नाक के नीचे। कई लोग ऐसे हैं जो हाथ में मास्क लेकर पूरे बाजार में घूम आते हैं। बाजार, अस्पताल या भीड़भाड़ वाले जगहों से घर लौटने के बाद लोग हाथों को सेनिटाइज करना तो दूर अब धोना भी मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। लोगों को समझना होगा कि जब तक कोई वैक्सिन या दवा बाजार में नहीं आ जाती, कोरोना से बचाव का साधन मास्क और सोशल डिस्टेंसिग ही है।

सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रहीं धज्जियां
इन दिनों सोशल डिस्टेंसिंग कुछ ही स्थानों पर देखने को मिल रही है। दुकानों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक में इनकी धज्जियां उड़ रही हैं। ऐसे में केस बढऩा लाजिमी है। उन्होंने कहा कि मास्क ना पहनने वालों का चालान किया जाए और उसका बाकायदा एक आंकड़ा जारी किए जाए। सरकार हर माह ऐसे लोगों का आंकड़ा जारी कर मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाए, ताकि लोग मास्क पहनकर ही बाहर निकलने के बारे में सोचें।

लक्षण फिर भी जांच से परहेज, बुखार की ले रहे दवा

रायपुर में हर सरकारी अस्पताल व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना जांच की निशुल्क सुविधा प्रदान कर रही है। निजी अस्पतालों में भी जांच शुरू हो गई है। लेकिन लोग जांच कराने से परहेज कर रहे हैं। जिन लोगों को लक्षण आ भी रहे हैं, वह बिना टेस्ट कराए नजदीक के डॉक्टर से बुखार और सर्दी की दवाएं लेकर खा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केस बढऩे के पीछे कई सारी वजह हैं। सीमित स्थानों पर छोटे-छोटे घरों में बड़ी संख्या में लोग निवासरत हैं और इन पूरे इलाकों में ही आबादी बेहद ज्यादा है। लॉकडाउन के दौरान प्रदेश से बाहर गए लोग भी वापस अपने काम पर लौट रहे हैं।

नियंत्रण के लिए कारगर रणनीति जरूरी
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि संक्रमण के बढ़ते मामलों से ज्यादा इस पर नियंत्रण को लेकर ठोस रणनीति बनाने की जरूरत है। संक्रमण पर नियंत्रण होने में कामयाबी मिलती है तो मामले अपने आप ही कम हो जाएंगे। उनका भी मानना है कि लोग अपनी जिम्मेदारियों को भूलते जा रहे हैं। बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है। साथ ही बार-बार हाथ धोने की आदत भी लोग भूलते जा रहे हैं।

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने यह करें

– साबुन से अच्छी तरह बार-बार हाथ धोएं।
– यदि कोई खांस या छींक रहा है तो उससे उचित दूरी बनाए रखें।

– अपनी आंखें, नाक या मुंह को न छुएं।
– घर से बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें।

– सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करें।
– खांसने या छींकने पर अपनी नाक और मुंह को कोहनी या टिश्यू पेपर से ढेक लें।

– यदि बुखार, खांसी है, और सांस लेने में परेशानी हो रही है तो तुरंत जांच कराएं।

 

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