09 Jul, 2020

मैन्युफैक्चरिंग से मजदूरों तक, लॉकडाउन के बाद खुलने वाली फैक्ट्रियों के लिए ये हैं दिशा-निर्देश…जरूर पढ़े

सिटी न्यूज रायपुर –

लॉकडाउन खुलने के बाद जब औद्योगिक इकाइयां शुरू हुई, तो पहले सप्ताह को फैक्ट्री में ट्रायल पीरियड या टेस्ट रन पीरियड माना गया . फैक्ट्री प्रबंधन सभी सुरक्षा मानकों का पालन करके, पहले ही सप्ताह में उत्पादन के उच्च लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता .

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रायपुर / नई दिल्ली  –   लॉकडाउन के बाद ढील के दौरान देश में दो तीन फैक्ट्रियों/औद्योगिक प्लांट में हुए हादसे के बाद इन औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा के लिए केंद्र की ओर से विस्तार से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. वैसी औद्योगिक इकाइयों जो खतरे की कैटेगरी में आती हैं उसे लेकर सरकार ने विशेष सतर्कता बरतने को कहा है. National Disaster Management Authority की ओर से जारी इन दिशा-निर्देशों में जिला प्रशासन की भूमिका तय की गई है.

सामान्य दिशा-निर्देश

1-लॉकडाउन खुलने के बाद जब औद्योगिक इकाइयां शुरू होंगी तो पहले सप्ताह को फैक्ट्री में ट्रायल पीरियड या टेस्ट रन पीरियड माना जाएगा. फैक्ट्री प्रबंधन सभी सुरक्षा मानकों का पालन करेंगे और पहले ही सप्ताह में उत्पादन के उच्च लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे.

2-खतरे की आशंका को कम करने के लिए वैसे कर्मचारियों को विशेष सतर्कता रखने की जरूरत है, जो विशेष मशीनों पर काम करते हैं. ऐसे कर्मचारी/स्टाफ/इंजीनियर मशीनों से आने वाली विचित्र आवाजें, विचित्र बदबू, खुली तारें, वाइब्रेशन, लीक, धुएं का ध्यान रखेंगे और जरूरत पड़ने पर मरम्मत करवाएंगे, अथवा प्लांट को बंद करवाएंगे.

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3-सभी मशीनों का समय-समय पर सुरक्षा मानकों के मुताबिक निरीक्षण किया जाएगा.

4-यदि किसी कारखाने में कोई तकनीकी समस्या हो और स्थानीय स्तर पर उसका निदान मुश्किल हो तो फैक्ट्री प्रबंधन को जिला मजिस्ट्रेट से संपर्क करना चाहिए.

विशेष उद्योगों के लिए दिशा-निर्देश

1-कच्चे माल के स्टोरेज की जांच की जाए. इसका ध्यान रखा जाए कि लॉकडाउन के दौरान कच्चे माल में कोई खराबी तो नहीं आई. सामान खराब होकर जहरीला तो नहीं हो गया.

2-वैसे कच्चे माल की जांच जो लॉकडाउन के दौरान खुले रह गए थे. क्या इन सामानों में कोई रासायनिक प्रक्रिया की वजह से जहरीला पदार्थ तो नहीं बन गया. रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल से पहले जांच होनी जरूरी है.

3- स्टोरेज एरिया में रोशनी और हवा के आने-जाने की पर्याप्त व्यवस्था की जाए.

4-सप्लाई पाइपलाइन/वॉल्व्स/ कन्वेयर बेल्ट की जांच होनी चाहिए. बता दें कि विशाखापट्टनम में वॉल्व्स में खराबी आने से ही गैस लीक की घटना हुई थी.

निर्माण इकाइयों के लिए दिशा निर्देश

1-फैक्ट्री को चालू करने से पहले पूरे औद्योगिक परिसर का सेफ्टी ऑडिट किया जाए.

2-सभी पाइप, उपकरण और डिस्चार्ज लाइन की उचित सफाई की जाए. जरूरत के मुताबिक एयर प्रेशर और वाटर प्रेशर से सफाई की जाए.

3-बॉयलर/ फ्यूरेंस को इस्तेमाल करने से पहले पूरी तरह से चेक किया जाए.

4-ध्यान रखा जाए कि सभी प्रेशर और टेम्प्रेचर से जुड़ी मशीनें ठीक से काम कर रही हैं.

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5-ज्वलनशील और जहरीले पदार्थों के संबंध में बेहद सावधानी का ध्यान रखा जाएगा. इन मशीनों को शुरू करने से पहले पूरी एहतियात बरती जाएगी.

6- इस बात की व्यवस्था की जानी चाहिए कि जरूरत पड़ने पर आपातकालीन टीम/ एक्सपर्ट प्रोफेशनल की टीम जल्द से जल्द घटनास्थल तक पहुंच सके.

मजदूरों/वर्करों के लिए दिशानिर्देश

1-फैक्ट्री परिसर में चौबीसों घंटे सैनिटाइजेशन प्रक्रिया चलती रहती चाहिए. लंच रूम, कॉमन रूम, मीटिंग हॉल को हर दो से तीन घंटे के बाद सैनिटाइज किया जाएगा.

2-औद्योगिक परिसर में काम करने वाले सभी कर्मचारियों का दिन में दो बार तापमान चेक किया जाएगा.

3-जिन कर्मचारियों/मजदूरों में कोई भी असामान्य लक्षण दिखे उन्हें काम पर नहीं आना चाहिए.

4-सभी कर्मचारियों के लिए हैंड सैनिटाइजर्स, ग्लव्ज और मास्क की व्यवस्था की जाएगी.

5- कोरोना संक्रमण से बचने के लिए क्या-क्या सावधानियां बरती जाएं, मजदूरों स्टाफ को इस बात की जानकारी देना.

6-वर्क फ्लोर और डाइनिंग हॉल में फिजिकल डिस्टेंसिंग की व्यवस्था करना

7-यात्रा करने वाले सभी स्टाफ को 14 दिनों के लिए क्वारनटीन किया जाएगा.

8-वैसी फैक्ट्रियां जो 24 घंटे काम करती हैं वहां, हर शिफ्ट में एक घंटे का फासला हो.

9-प्रबंधकीय और प्रशासनिक सेवा के लिए काम कर रहे लोग एक शिफ्ट में कुल क्षमता का 33 प्रतिशत ही मौजूद रहेंगे.

10-जहां तक संभव हो स्टाफ/मजदूर वर्क स्टेशन शेयर नहीं करें.

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