रायपुर, छत्तीसगढ़ में भाजपा ने 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। इस चुनाव के लिए भले ही भाजपा अभी तक कोई ठोस मुद्दा नहीं तलाश पा रही है लेकिन यह बात तो तय है कि मोदी के संदेश का असर छत्तीसगढ़ की राजनीति पर पड़ने वाला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पार्टी नेताओं के परिवार के सदस्यों को चुनावी राजनीति में नहीं उतारने का संदेश दिया है। भाजपा की प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी भी माेदी का यही संदेश लेकर छत्तीसगढ़ का लगातार दाैरा कर रही हैं। साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के टक्कर के ओबीसी नेता की भी तलाश शुरु हो गई है।IMG 20220506 225957 | City News - Chhattisgarhदरअसल केंद्रीय संगठन ने परिवार के एक सदस्य को सक्रिय राजनीति में उतारने का संकेत दिया है। हाल ही में दो दिन के दौरे पर आईं पुरंदेश्वरी ने दुर्ग और रायपुर मे हुई बैठक में भाजपा नेताओं को मोदी का संदेश देते हुए आगामी चुनाव के लिए नए चेहरे तलाशने तथा परिवारवाद को दूर रखने की नसीहत दी है। इसी कडी में दमदार ओबीसी नेता की भी तलाश की जा रही है क्योंकि छत्तीसगढ में ओबीसी की बहुलता भी है। मौजूदा राजनीतिक परिवेश में भाजपा में पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर,पूर्व विधानसभा आध्य्क्ष धरमलाल कौशिक के अलावा कोई दमदार नेता नहीं है। ऐसे में नए नेता की तलाश जरुरी हो गया है।IMG 20220506 225957 | City News - Chhattisgarhइस बार प्रदेश के कई ऐसे भाजपा नेता किसी न किसी बहाने से अपने परिवार के किसी न किसी सदस्य के लिए अभी से ग्राउंड तैयार कर रहे हैं ताकि उन्हें 2023 के चुनाव में उतारा जा सके क्योंकि अभी यहां भाजपा के 15 विधायक हैं जो अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे है। बाकि विधान सभा क्षेत्र में कांग्रेस और अन्य विधायक हैं । ऐसे में भाजपा के दिग्गज नेताओं को अपने लोगों के लिए मैदान तैयार करने का बढिया मौका मिल गया है और वे ऐन-केन टिकट की जुगाड में लग गये हैं। लेकिन मोदी के इस संदेश से वे चिंता में पड़ गए हैं। यह भी माना जा रहा है कि बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव में नए चेहरों पर दांव लगाएगी।IMG 20220506 225957 | City News - Chhattisgarhसक्रिय युवा कार्यकर्ता उत्साहित
मोदी के इस संदेश से ऐसे जमीनी नेता काफी उत्साहित हैं जो लंबे समय से पार्टी का झंडा उठाते आए हैं और जिन्हें परिवारवाद के कारण आगे आने का मौका नहीं मिल पा रहा था। भाजपा में कई ऐसे नेता भी शामिल हैं जो दिग्गज नेताओं के क्षेत्र से आते हैं लेकिन परिवारवाद के कारण उन्हें आगे आने का मौका नहीं मिल पा रहा था। यही वजह है कि पुरंदेश्वरी के इस संदेश के बाद प्रदेश भर में धरना-प्रदर्शन आंदोलन तेज हो गई है।IMG 20220506 225957 | City News - Chhattisgarhपरिवारवाद की लाइन में नेता
बस्तर में बलीराम कश्यप के बेटे केदार कश्यप ‌विधायक और मंत्री रह चुके हैं जबिक दिनेश कश्यप लोकसभा सदस्य चुने गए थे। इसी तरह दुर्ग में ताराचंद साहू के बेटे दीपक साहू भी पिछला विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह सांसद रह चुके हैं लेकिन पिछले चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया था।IMG 20220506 225957 | City News - Chhattisgarhजमीनी हकीकत से वाकिफ हो रही
पुरंदेश्वरी लगातार छत्तीसगढ़ के दौरे पर आ रहीं हैं। इस दौरान वे प्रदेश में भाजपा नेताओं की जमीनी हकीकत से वाकिफ हो रही हैं। वे दो बार बस्तर का दौरा कर चुकीं हैं। इस दौरान उन्होंने ऐसे नेताओं से बातचीत की जो परिवारवाद की राजनीति से दूर हैं। ऐसा कर उन्होंने नए चेहरे की तलाश के संकेत दे दिये हैं।IMG 20220506 225957 | City News - Chhattisgarh