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रायपुर। रायपुर स्थित एम्स की बिल्डिंग से कूदकर जांजगीर-चांपा निवासी कोरोना संक्रमित शिक्षक मुरलीधर साहू (49)  ने जान दे दी। इसकी जानकारी परिवार को हुई। किसी को भी यकीन नहीं हुआ। मृतक के चाचा और भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष डा. कैलाश साहू ने बताया कि मुरलीधर की तीन बेटियां हैं, जो पढ़ाई कर रही हैं। मुरलीधर को बीपी के अलावा किसी तरह की अन्य स्वास्थ्यगत या पारिवारिक समस्याएं भी नहीं थीं।

जान देने के कुछ घंटे पहले मृतक ने स्वजनों से बातचीत भी की थी। फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि उसे इस तरह आत्मघाती कदम उठाया पड़ा? स्वजनों में इसे लेकर हैरान हैं। शिक्षक मुरलीधर साहू जांजगीर-चांपा जिले के सरकारी स्कूल डोटमा ग्राम में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

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ऐसे में सामाजिक रूप से भी लोगों से वह जुड़े थे और लोगों से उनके बेहतर संबंध थे। अचानक इस तरह की खबर से परिवार के अलावा ग्रामवासी भी हैरान हैं। डा. कैलाश ने बताया कि घटना की जानकारी पत्नी और बच्चों को नहीं दी है। अस्पताल से फोन जाने के बाद दोपहर ही रायपुर के लिए वह रवाना हो गए थे।

मरीजों की मानिटरिंग नहीं
प्रबंधन ने कोरोना वार्ड और अन्य परिसरों में सुरक्षा और मानिटरिंग की व्यवस्था पर्याप्त करने की बात कही है, लेकिन दो घटनाओं से सुरक्षा तो दूर, चिकित्सा कर्मियों द्वारा मानिटरिंग व्यवस्था पर भी पोल खुल गई है। वहीं सभी वार्डों की खिड़कियों में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोहे की जाली नहीं लगाई गई है। एम्स के अनुसार घटनाक्रम में मुरलीधर ने बाथरूम में जाकर अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। खिड़की पर लगी जाली को तोड़कर वहां से छलांग लगाकर दी।
एम्स में इस तरह की दूसरी घटना
एम्स में इस तरह की यह दूसरी घटना है। इससे पहले रायपुर निवासी 65 वर्ष्ाीय संक्रमित मरीज ने इसी तरह से सी ब्लाक से कूदकर जान दे दी थी। यह घटना 11 अगस्त की थी, जहां रात 1:30 बजे कोरोना संक्रमित मरीज ने बिल्डिंग से अचानक कूद गया था। तब अस्पताल प्रबंधन ने 65 वर्षीय मरीज के मानसिक स्थिति ठीक ना होने की जानकारी दी थी, पुलिस की जांच इस मामले में भी अधूरी है।

मीडिया पर रोक, पुलिस ने किया हस्तक्षेप

सुरक्षा व्यवस्था में चूक से जिस तरह से घटना हुई। इसके बाद एम्स में सुरक्षा गार्ड अचानक एक्टिव हो गए। हर आने-जाने वालों को रोककर जांच करते दिखे। इस बीच सुरक्षा गार्ड सामान्य लोगों के साथ ही मीडिया को भी एम्स परिसर के अंदर प्रवेश करने से रोकते नजर आए। यही नहीं परिसर के बाहर मुख्य सड़क मार्ग से भी फोटो खींचने पर आपत्ति थी। मामले में भीड़ बढ़ने के बाद आमानाका पुलिस के हस्तक्षेप और निर्देश के बाद स्थिति सामान्य हुई है।

इस मामले में एम्स के डायरेक्टर डा. नितिन एम नागरकर ने कहा कि मृतक का बेहतर इलाज चल रहा था। घटना के कुछ देर पहले चिकित्सकों ने उसकी पूरी जांच की। स्थिति बेहतर होने की वजह से उसे जल्द डिस्चार्ज करने वाले थे। मगर, अचानक इस तरह से घटना समझ से परे है। कोरोना संक्रमण को लेकर काफी शोध हुए हैं। संक्रमण की वजह से मस्तिष्क में आक्सीजन की कमी हो जाती है।

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वायरस फेफड़े, हृदय, मस्तिष्क व अन्य हिस्सों में भी इंफेक्शन फैलता है। वहीं इलाज के दौरान परिवार और किसी भी तरह के संपर्क से दूर आइसोलेशन में रहने की वजह से मरीज तनाव में होता है। इससे कई तरह की मनोवृत्ति सामने आती है। इसके लिए जांच, इलाज और काउंसिलिंग की भी पूरी व्यवस्था है।

वहीं, कोरोना नियंत्रण अभियान के राज्य नोडल अधिकारी डा. सुभाष पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार की निगरानी में ही चिकित्सा व्यवस्थापन का कार्य संचालित होता है। घटना जिस तरह से हुई है, उसे लेकर एम्स से रिपोर्ट मांगेंगे। कोरोना संक्रमण के दौरान मरीज की स्थिति सामान्य से अलग होती है। इसलिए उनकी सुरक्षा और देखरेख की जरूरत अधिक है। यह तो अस्पताल की जिम्मेदारी भी है।