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  • बीजापुर नक्सली हमले की कहानी 

रायपुर। बीजापुर नक्सली हमले : हम शुक्रवार रातभर चलकर शनिवार सुबह करीब 8 बजे बीजापुर और सुकमा जिले के बॉर्डर एरिया के जोनागुड़ा क्षेत्र में पहुंचे थे। नक्सलियों का हलचल हमें दिखा, नक्सलियों ने हम पर फायरिंग कर दी। हमने भी उन्हें करारा जवाब दिया। हमारे लड़कों ने जबरदस्त बहादुरी दिखाई, नक्सलियों हमें एंबुश में फंसाने की कोशिश की, मगर हमने उस घेरे को तोड़ा और आगे बढ़े।

ये बातें मीडिया को जब संदीप द्विवेदी बता रहे थे, उनका दाहिना हाथ पट्टियों से लिपटा था और पैर में भी गंभीर चोटें आई थीं। चेहरे पर मुस्कान थी और जोश ऐसा कि मानों फिर से उठ कर चल देंगे घने जंगलों में नक्सलियों को जवाब देने। बातचीत के दौरान वे बीच-बीच में मुस्कुराते भी रहे, इसी दौरान की एक फोटो किसी ने क्लिक की और सोशल मीडिया पर पोस्ट की जो अब वायरल है।

बीजापुर नक्सली हमले

संदीप CRPF के खास लड़ाकू दस्ते और कमांडोज की फौज वाले कोबरा टीम के सेकंड इन कमांड अफसर हैं। बीजापुर में बीते शनिवार को हुई मुठभेड़ में इन पर नक्सलियों ने गोलियां चलाईं। पहाड़ की उंचाई से बम बरसाए। संदीप अपने साथी जवानों को बचाते हुए नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दे रहे थे। इतने में एक बम विस्फोट की चपेट में आकर वे घायल हो गए। रविवार को इन्हें एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से रायपुर लाया गया। अब इनका उपचार एक प्राइवेट हॉसपीटल में जारी है।

संदीप ने मुस्कुराकर बोले- थैंक्यू सर

गृहमंत्री अमित शाह सोमवार की शाम रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल आए। उन्होंने संदीप द्विवेदी से भी मुलाकात की। संदीप घायल अवस्था में बेड पर थे, शाह के आते ही थोड़ा उठे और मुस्कुराकर कहा- हैलो सर, शाह ने कहा- हिम्मत रखो, बच जाएगा तुम्हारा हाथ..पक्का बच जाएगा, कहां के हो ? संदीप बोले- सर यूपी, फिर गृहमंत्री शाह ने कहा- डॉक्टर को भरोसा है और मुझे भी कॉन्फिडेंस हैं, ठीक से आराम करो जल्दी ठीक हो जाओगे। संदीप ने मुस्कुराकर बोले- थैंक्यू सर।

मीडिया से बातचीत में संदीप द्विवेदी ने बीजापुर में हुई नक्सल मुठभेड़ से जुड़ी अहम बता बताई। उन्होंने कहा कि जवानों के हर मूवमेंट की जानकारी गांव के लोग और महिलाएं नक्सलियों को दे रहे थे। इस वजह से नक्सलियों ने दूर पहाड़ी पर ऐसी पोजिशन पहले से ले रखी थी कि हम पर हमला कर सकें। हम भी जब जोनागुड़ा की तरफ जा रहे थे तो पता था कि कुछ हो सकता है वहां। जब टीम वहां गई तो उनकी तरफ से बड़ी फायरिंग की गई।

माओवादियों का प्लान और बड़ा था

संदीप ने आगे कहा कि हमारे लड़कों ने उनका घेरा तोड़ दिया। जवानों की बहादुरी के चलते ही हम एक महिला नक्सली का शव रिकवर करने में कामयाब रहे नहीं तो नक्सली डेड बॉडी ले जाने नहीं देते। इस मुठभेड़ के लिए नक्सली पूरी तैयारी में थे, हमें इनपुट मिल रहे थे कि उनके बड़े कमांडर काफी समय से उस एरिया में थे। वहां उनका प्लान बड़ा था। मगर हम कामयाब रहे उन्हें नाकाम करने में। हमारा थोड़ा लॉस हुआ, लेकिन, काफी नक्सली भी मारे गए।

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लगभग 5 घंटे होती रही फायरिंग पहाड़ से बम गिर रहे थे…

अस्पताल में इलाज करवा रहे अंबिकापुर के एक जवान ने बताया कि वो स्पेशल टास्क फोर्स टीम का हिस्सा थे। जोनागुड़ा में नक्सली रॉकेट लॉन्चर और बम पहाड़ी से हम पर फेंक रहे थे। लगातार गोलियां चल रही थीं और बम ब्लास्ट हो रहे थे। हमें पोजिशन के लिए वक्त ही नहीं मिला। करीब 150 मीटर दूरे पहाड़ से फायर हो रहा था। हम जैसे तैसे गांव की तरफ बढ़े फायरिंग के बीच घायल जवानों का इलाज चल रहा था। हमें फिर से नक्सलियों ने घेर लिया। वहां भी हमने फायरिंग की। हमें पता था कि यहां मुठभेड़ होगी, मगर इतनी हैवी फायरिंग होगी ये नहीं पता था।