छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में माओवादियों ने एक बार फिर किरंदुल- विशाखापट्टनम रेलवे मार्ग को अपना निशाना बनाया। शुक्रवार देर रात माओवादियों ने झिरका के जंगल में ट्रैक को उखाड़ दिया, जिससे किरंदुल से लौह अयस्क लेकर विशाखापट्टनम जा रही मालगाड़ी के 3 इंजन समेत 19 डिब्बे पटरी से उतर गए। रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त होने और सिंगल लाइन होने की वजह से किरंदुल से जगदलपुर तक ट्रेन की आवाजाही बंद हो गई है। हालांकि जगदलपुर-विशाखापट्टनम मार्ग चालू है।

मालगाड़ी के 19 डिब्बे पटरी से उतरे हैं।
मालगाड़ी के 19 डिब्बे पटरी से उतरे हैं।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार की रात करीब 8.35 मिनट पर झिरका के जंगल में भांसी और कमालूर के बीच नक्सलियों ने मालगाड़ी डिरेल की है। भैरमगढ़ एरिया कमेटी के माओवादियों ने इस घटना को अंजाम दिया है। मालगाड़ी के पहिए ट्रैक से उतरने के बाद वहां मौजूद 100 से जयादा माओवादियों ने इंजन में बैनर पोस्टर भी लगा दिए। सूचना मिलने पर जवान मौके पर पहुंचे हैं।

माओवादियों ने किरंदुल- विशाखापट्टनम रेलवे मार्ग को अपना निशाना बनाया।
माओवादियों ने किरंदुल- विशाखापट्टनम रेलवे मार्ग को अपना निशाना बनाया।

गढ़चिरौली की मुठभेड़ के विरोध में बंद का आह्वान
नक्सलियों ने गढ़चिरौली में हुई मुठभेड़ में मारे गए अपने 27 साथियों को श्रद्धांजलि दी है। वहीं इस मुठभेड़ के विरोध में छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्य प्रदेश में 27 नवंबर को बंद का आह्वान किया है। कुछ दिन पहले भी नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी ने प्रेस नोट जारी कर बंद का आह्वान किया था। नक्सलियों के बंद को लेकर अब पुलिस भी अलर्ट हो गई है।

नक्सलियों में जगह-जगह पोस्टर भी चस्पा किए हैं।
नक्सलियों में जगह-जगह पोस्टर भी चस्पा किए हैं।

रात में स्पॉट पहुंचे जवान, रेलवे के कर्मचारी भी हैं मौजूद
इस घटना की सूचना मिलते ही भांसी थाना और DRG के जवान घटनास्थल पहुंच गए हैं। रेलवे के कर्मचारी भी रात से मार्ग को बहाल करने में लगे हुए हैं। नक्सलियों ने इस बार ट्रैक को ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्ग बहाल करने में लगभग 2 दिन से ज्यादा समय लग सकता है।

मालगाड़ी में करोड़ो रुपए का लौह अयस्क भरा हुआ था।
मालगाड़ी में करोड़ो रुपए का लौह अयस्क भरा हुआ था।

6 महीने पहले पैसेंजर ट्रेन को किया था डिरेल
नक्सलियों ने 6 महीने पहले भांसी-कमालूर के पास ही रेलवे पुल के ऊपर एक पैसेंजर ट्रेन को डिरेल किया था। हालांकि उस समय लोको पायलट ने अपनी सूझबूझ दिखाई थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया था। यह इलाका पूरी तरह से नक्सलियों का गढ़ है, इसलिए इस इलाके में ट्रेनों की रफ्तार काफी धीमी की जाती है। जिस वक्त पैसेंजर ट्रेन डिरेल हुई थी, उस समय केवल इंजन ही ट्रैक से नीचे उतरा था। रात भर कड़ी मशक्कत करने के बाद मार्ग को बाहर किया गया था। यात्रियों को सुरक्षित जिला मुख्यालय लाया गया था।