राज्य के निकायों, जिला पंचायत व अन्य जगहों पर वॉटर एटीएम लगाने के लिए राइट वॉटर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को काम मिला। पूरे प्रदेश में करीब 198 वॉटर एटीएम लगाए गए।

दुर्ग में भी इस कंपनी ने काम किया। यहां कंपनी ने सुपर वाइजर राघवेंद्र तिवारी को नियुक्त किया। राघवेंद्र ने जिला सहकारी बैंक में कंपनी का फर्जी खाता खोला और करीब 8 लाख रुपए इस खाते में ट्रांसफर करा लिए। आरोपी राघवेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया है। कंपनी के मैनेजर सत्यम विहार कॉलोनी रायपुर निवासी राजेश श्रीवास्तव की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई।

जानिए क्या है पूरा मामला : 

राज्य सरकार ने प्रदेश के जिलों में वॉटर एटीएम लगाने के लिए कंपनी को अधिकृत किया। कंपनी को स्थानीय निकाय या प्रशासन से अनुबंध कर वॉटर एटीएम लगाया जाना था। इसके आधार पर स्थानीय प्रशासन द्वारा राशि का भुगतान किया जाता। दुर्ग में भी ऐसे एटीएम लगाए गए। इसके एवज में कंपनी का फर्जी अकाउंट जिला सहकारी बैंक में खोला गया।

साथ ही करीब 8.04 लाख रुपए इस खाते में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर करा लिए गए। इसके बाद राघवेंद्र ने अगस्त 2020 को नौकरी छोड़ दी। रिकवरी के लिए कंपनी के अन्य कर्मी स्थानीय प्रशासन तक पहुंचे। तब मामला खुला।

आरोपी गिरफ्तार, रिमांड पर भेजा जेल : 

मैनेजर राजेश की शिकायत पर पुलिस ने मामले में जांच शुरू की। अपराध दर्ज करने के साथ शिक्षक नगर निवासी राघवेंद्र को गिरफ्तार किया गया। टीआई राजेश बागड़े ने बताया कि जीएसटी की राशि कटने के बाद कंपनी को धोखाधड़ी का पता चला। इसके बाद कंपनी ने जांच की तो सुपरवाइजर द्वारा इस प्रकार से खाता खोले जाने का पता चला।

दुर्ग में इस प्रकार के 13 एटीएम लगाए गए हैं। इसके अलावा जिले के अन्य निकायों में भी एटीएम लगे हैं। कंपनी वाटर प्यूरीफिकेशन संयंत्र की सप्लाई, इंस्टालेशन, कमिशनिंग और आपरेशन एंड मेंटेनेंस का काम करती है।