जिले के एक युवक ने हाइड्रोजन से चलने वाला एक इंजन बनाया है। इसे पेटेंट कराने के लिए युवक ने करीब सात साल पहले आवेदन किया था। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा युवक के एन इंजन दैट यूजेज हाइड्रोजन एज फ्यूल नाम से पेटेंट कर लिया है। जिले के पामगढ़ ब्लाक अंतर्गत (बोरसी )कोसा गांव के 30 वर्षीय युवक राहुल भारद्वाज ने हाइड्रोजन से चलने वाला फ्यूल इंजन बनाया है।

वे भारत के पहले हाइड्रोजन फ्यूल इंजन पर अपना नाम रजिस्टर कराने वाले पहले युवा बन गए हैं। राहुल ने बारहवीं की पढ़ाई मल्हार जवाहर नवोदय विद्यालय से 2009 में तथा ग्रैजुएशन ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर्नाटक में गुलबर्ग से 2013 में पूरी की है। जिसके बाद इस क्षेत्र में आगे काम करने लगे और पानी से हाइड्रोजन निकाल कर उसे ऊर्जा में बदल कर उससे एक प्रकार का मोटरसाइकिल इंजन में प्रयोग भी किया।

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तीन साल तक काम के बाद पेटेंट के लिए आवेदन

राहुल ने बताया कि वे 2010 से इस फ्यूल सिस्टम पर कार्य कर रहे थे, जिसके बाद उन्होंने अपने प्रोजेक्ट को 2013 में पेटेंट कराने केंद्र सरकार के पेटेंट कार्यक्रम में आवेदन किया तब जाकर कार्यालय ने इसकी जांच पड़ताल कर अगले 20 वर्षो के लिए उनके नाम पर पेटेंट किया है। ये तकनीक अभी विश्व मे चार देश जापान, अमेरिका, कोरिया और भारत के पास है। राहुल भारत को रिप्रजेंट कर रहे है।

हाईड्रोजन इंजन पेट्रोल और डीजल से ज्यादा पावर फुल

राहुल ने दैनिक भास्कर को बताया कि यह एक ऐसी तकनीक का जिसपर आने वाले दिनों में ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन बेचने की तैयारी है। उन्होंने बताया सऊदी अरब ,जापान , जर्मनी, चीन, अमेरिका एवं अन्य देश भी इस पर काम कर रहे हैं, ये तकनीक अभी भले ही महंगी है लेकिन पेट्रोल, डीजल से ताकत में ज्यादा और वातावरण को कम प्रदूषित करने वाली है। अगर सरकार इसे भारत मे बनाने मंजूरी दी तो इसे बनाने में आई लागत को कम किया जा सकता है।

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बड़े भाई भी इंजीनियर करते हैं विदेश में काम

राहुल के बड़े भाई आरजी ब्रजेश ने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और वे भी इसी तरह से अविष्कार की सोच रखा करते थे। फिर एक दिन विदेशी कंपनी में काम के ऑफर आने पर वे विदेश चले गए। राहुल चाहते है कि जब भी ये प्रोजेक्ट पर सरकार काम करे तो यह कार्य छत्तीसगढ में हो जिससे राज्य के लोगों को रोजगार मिले और छत्तीसगढ़ के इकोनॉमी में वृद्धि हो ।