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बच्चों को घर पर ही पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रयासों को शासन ने सराहा, बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखने के लिए निर्देश

कोरोना-काल में शिक्षकों से कोई भी दूसरा काम नहीं लिया जा सकेगा। राज्य भर से यह शिकायत मिल रही है कि शिक्षकों से कोरोना मरीजों की पहचान जैसे अभियान में लगाया गया है। लेकिन सोमवार से ऐसा नहीं हो पाएगा। प्रमुख सचिव शिक्षा आलोक शुक्ला ने सभी डीईओ को एक आदेश जारी कर शिक्षकों से कोई दूसरा काम न लेने की सख्त हिदायत दी है।

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने सभी कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर स्वेच्छा से कार्य कर रहे शिक्षकों के प्रयासों को सराहा है।

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उन्होंने कहा है कि इन शिक्षकों पर किसी तरह का दबाव न बनाया जाए। उन्हें अन्य कार्यों से पूरी तरह मुक्त रखा जाए, ऐसे कार्यों में उनकी ड्यूटी न लगाई जाए। प्रमुख सचिव ने कहा है कि राज्य के शिक्षकों के उत्साह और स्वेच्छा से किये जा रहे कार्यों को देखते हुए, तथा कोरोना के समय बच्चों को घर पर ही पढ़ाई जारी रखने का अवसर प्रदान करने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि राज्य के शिक्षकों के स्वैच्छिक प्रयासों को पूरा सहयोग प्रदान किया जाए। इसके लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं कि स्कूल ग्रांट आदि की राशि के उपयोग से पठन-पाठन सहायक सामग्री उपलब्ध कराने की अनुमति प्रदान की जाएगी, जैसे- वर्क बुक, कलरिंग बुक, क्रेयान, शैक्षणिक खिलौने आदि। राज्य शैक्षणिक अनुसंधान परिषद तथा समुदाय के साथ मिलकर वैकल्पिक पाठ्यक्रम, पैडागॉजी की तकनीकें, लेसन प्लान, पढ़ाई में स्थानीय संसाधनों के उपयोग आदि के संबंध में विस्तृत सामग्री तैयार की जाएगी। यह सामग्री स्व-प्रेरणा से कार्य कर रहे शिक्षकों को उपलब्ध कराई जाएगी। उन्हें इस सामग्री के उपयोग के लिए ऑन-लाइन प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कलेक्टरों से कहा गया है कि बच्चों की सुरक्षा, बैठने के स्थान की साफ-सफाई आदि का पूरा ध्यान रखा जाए। कोरोना से बचाव संबंधी निर्देशों, विशेषकर सैनिटाइजेशन, मॉस्क, सामाजिक एवं भौतिक दूरी आदि का पालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। कोरोना जांच और क्वारंटाइन संबंधी सभई निर्देशों का पालन भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। किसी व्यक्ति को सर्दी, खांसी, बुखार अथवा कोरोना का कोई अन्य लक्षण नजर आए, तो उसे इन कार्यक्रमों में भाग न लेने दिया जाए, उसकी तत्काल कोरोना जांच कराकर नियमानुसार उचित कार्यवाही की जाए। कोरोना के समय अपने कर्तव्यों से कहीं आगे बढ़कर बच्चों को घर पर ही पढ़ाई कराने के नवाचारी प्रयास करने वाले ये शिक्षक देश के भविष्य की रक्षा करने वाले कोरोना-योद्धा हैं, उन्हें कोरोना योद्धा के रूप में सम्मानित किया जाए।

कोरोना-काल में शिक्षकों से कोई भी दूसरा काम नहीं लिया जा सकेगा। राज्य भर से यह शिकायत मिल रही है कि शिक्षकों से कोरोना मरीजों की पहचान जैसे अभियान में लगाया गया है। लेकिन सोमवार से ऐसा नहीं हो पाएगा। प्रमुख सचिव शिक्षा आलोक शुक्ला ने सभी डीईओ को एक आदेश जारी कर शिक्षकों से कोई दूसरा काम न लेने की सख्त हिदायत दी है।corona

व्यक्तिगत स्तर पर पढ़ाई के लिए नए-नए प्रयोग कर रहे
दरअसल, लॉकडाउन की वजह से स्कूल बंद हैं। इसके बावजूद शिक्षक व्यक्तिगत स्तर पर कई तरह के प्रयोग कर रहे हैं, जिससे बच्चों को पढ़ाई से जोड़ा जा सके। मध्याह्न भोजन बांटने के लिए भी शिक्षक जुटे हुए हैं। इस बीच कोरोना मरीजों की पहचान या दूसरे तरह के काम से पढ़ाई से जुड़े काम प्रभावित होते हैं। इस कारण ही प्रमुख सचिव ने सख्त निर्देश दिए हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

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