रायपुर। देश में एक बार फिर कोरोना ब्लास्ट हुआ है, संक्रमण की तेज रफ्तार सबको डराने लगी है। फिर एक साल पहले जैसे हालात हैं। आंकड़े बताते हैं कि अगर जल्द ही हालात पर काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और विकराल हो जाएगी। केंद्र और राज्य सरकारें लगातार समीक्षा बैठक लेकर हालात का जायजा ले रही है। छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां भी कोरोना की तीसरी लहर में आम जनता के साथ मंत्री-विधायक भी चपेट में हैं। हालात को देखते हुए रायपुर समेत कई शहरों में प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। लेकिन विपक्ष इसे नाकाफी बता रहा है। ऐसे में सवाल है क्या हालात को कंट्रोल करने के लिए अब लॉकडाउन ही विकल्प है।

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और तीसरी लहर को लेकर सरकारें अलर्ट मोड पर आ गई है। रविवार को जहां पीएम मोदी ने इससे निपटने की तैयारियों का जायजा लिया, तो सोमवार से पूरे देश में बूस्टर डोज लगने की शुरूआत हुई। इससे पहले पीएम ने समीक्षा बैठक में वैक्सीनेशन पर खास जोर देने का निर्देश दिया। साथ ही नई लहर की चुनौतियों से निपटने बच्चों के लिए टीका को मिशन मोड में पूरा करने को कहा। आंकड़ों पर गौर करें तो देश में बीते 24 घंटे में डेढ़ लाख से ज्यादा कोरोना मरीज मिले हैं, जो पिछले 7 महीने में सबसे ज्यादा है। ओमिक्रॉन वैरिएंट के बढ़ते मामलों को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार भी अलर्ट मोड पर है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है कि दूसरी लहर से सीख लेते हुए हरसंभव तैयारी कर ली है।

इधऱ छत्तीसगढ़ में कोरोना की तीसरी लहर की चपेट में आम लोगों के साथ वीआईपी और जनप्रतिनिधि भी आने लगे हैं। वहीं राजधानी रायपुर बड़ा हॉटस्पॉट बन चुका है। रविवार को रायपुर में 15 बच्चे समेत 830 नए मामले सामने आए, जिसके बाद रायपुर में 55 कंटेनमेंट जोन एक्टिव हैं। संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए मंगलवार से मंत्रालय में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके के लिए सभी विभाग रोस्टर बनाकर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाएंगे। दूसरी ओर बीजेपी कह रही है कि शासन-प्रशासन को और कठोर कदम उठाने होंगे।

बहरहाल कोरोना ने जिस तरह यू टर्न लिया है, उससे केंद्र समेत राज्य सरकारों की टेंशन जरूर बढ़ा दी है। हालांकि कोरोना संक्रमण से बचने का एक ही मंत्र है कि मास्क लगाएं और भीड़भाड़ वाली जगहों में सामाजिक दूरी का पालन करें।