शिक्षिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज- पुलिस अधीक्षक 


बिलासपुर
 कोरोना संक्रमित एक शिक्षिका के सम्पर्क में ट्यूशन पढऩे वाले 40 बच्चों के सम्पर्क में आने की ख़बर झूठी पाई गई है। बिलासपुर पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि यह एक गलत ख़बर है।

अलबत्ता दूसरे प्रदेश से आने के बावजूद सूचना नहीं देने की वजह से शिक्षिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

न्यूज़ पोर्टलर दिनभर चली एक खबर का बिलासपुर पुलिस ने खंडन किया। इसमें कहा गया था कि एक शिक्षिका माह भर पहले चार मई को झारखंड से आई और जिला प्रशासन को सूचना दिये बगैर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगी।

उसके सम्पर्क में करीब 40 छोटे बच्चे आ गये, जिनको अभिभावकों के साथ क्वारांटीन कर दिया गया है।

पुलिस अधीक्षक ने बताया है कि महिला चार मई को नहीं बल्कि चार जून को झारखंड से आई थी। राज्य के बाहर से आने के बावजूद उसने जिला प्रशासन अथवा स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना नहीं दी। इसे लेकर उसके खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई है।

पुलिस आगे आ रही, प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग मौन 

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण लगभग पूरा बिलासपुर जिला रेड जोन में शामिल है। हाल ही में यहां बनाये गये संभागीय कोविड अस्पताल में बेड की कमी पड़ गई है, जिसके चलते गंभीर मरीजों को रायपुर रेफर किया जा रहा है।

बिलासपुर के रेलवे अस्पताल को कोविड-19 के उपचार के लिये अधिग्रहित कर लिया गया है तथा आने वाले दिनों में अन्य अस्पतालों के बेड भी लिये जा सकते हैं।

शहर में लोग कोरोना संक्रमण की स्थिति जानने के लिये लोग उत्सुक हैं लेकिन प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से अधिकारिक जानकारी देने के लिए कोई भी अधिकृत नहीं है।

पुलिस की ओर से अपने हिस्से की जानकारी जरूर सोशल मीडिया, वाट्सअप, ट्विटर और फेसबुक के जरिये दी जा रही है।

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