सप्ताह के दौरान देश के शेयर बाजारों की चाल कोविड-19 के मोर्चे पर बनने वाली स्थिति, वृहद आर्थिक आंकड़ों, कंपनियों के तिमाही परिणामों और वैश्विक स्तर पर बनने वाले रुझानों के मुताबिक तय होगी।   

विश्लेषकों का मानना है कि राज्यों के विधानसभा चुनाव पिरणामों का बाजार पर बमुश्किल ही कोई असर होगा, लेकिन सप्ताह के दौरान कोविड- 19 के मोर्चे पर घटने वाले घटनाक्रमों और केन्द्र तथा राज्य सरकार के इस स्थिति से निपटने की रणनीति से बाजार की चाल पर असर होगा। 

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दिखेगा चुनाव नतीजों का असर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों का असर आने वाले सप्ताह में शेयर बाजार पर हावी रहेगा। केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी और चार राज्यों में पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनावों की मतगणना रविवार को हुई। इसमें पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम में निवेशकों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी थी।

केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में बहुमत से बहुत दूर रही। इसके चलते शेयर बाजार में इस हफ्ते बिकवाली देखी जा सकती है। इससे पहले विभिन्न एग्जिट पोल में पश्चिम बंगाल में भाजपा के पिछड़ने की संभावना जताये जाने के बाद शुक्रवार को ही सेंसेक्स 948 अंक और निफ्टी 264 अंक लुढ़क गया था।

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ऑटो कंपनियों के शेयर पर रहेगा दवाब

वाहन निमार्ता कंपनियों के शेयरो में पिछले हफ्ते मिश्रित रुख रहा। महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर 3.31 प्रतिशत और मारुति सुजुकी का 3.22 प्रतिशत लुढ़क गया जबकि बजाज ऑटो में 4.37 प्रतिशत की मजबूती रही। हालांकि, इस हफ्ते दवाब देखने को मिल सकता है क्योंकि अप्रैल में गाड़ियों की बिक्री गिरी है। इसका असर कंपनियों के शेयर पर देखने को मिल सकता है।

छोटे निवेशक सावधान रहें

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में अभी जो माहौल है उसमें खुदरा निवेशकों को ट्रेडिंग से ज्यादा ध्यान लंबे समय के लिए निवेश करने पर देना चहिए। बाजार में कुछ समय के लिए उठा-पटक रह सकती है लेकिन लंबी अवधि में रुझान सकारात्मक रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को मुश्किलों के बावजूद शेयर बाजार में बने रहना चाहिए। हालांकि, अच्छी कंपनी का चुनाव ही करना चाहिए जिसमें जोखिम कम हो और लंबे समय में रिटर्न मिलने की उम्मीद हो।

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जियोजित फाइनेंसियल सविर्सिज की राय

जियोजित फाइनेंसियल सविर्सिज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, ”चुनाव परिणामों का बाजार पर मुश्किल ही कोई असर पड़ेगा। इसकी खबर कुछ ही घंटों तक बाजार में टिक सकती है सबसे बड़ा मामला होगा कोविड- 19 संक्रमण के बढ़ते मामले और इन पर काबू पाने के लिये केन्द्र और राज्यों द्वारा क्या कदम उठाये जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोविड- 19 के बढ़ते मामलों पर काबू नहीं पाया जाता और एक और देशव्यापी लॉकडाउन लगता है तो बाजार पर व्यापक असर पड़ेगा। 

रेलिगेयर ब्रोकिंग का अनुमान

रेलिगेयर ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ”हम उम्मीद कर रहे हैं कि इस सप्ताह भी बाजार में ज्यादा उठापटक रहेगी। सबसे पहले कारोबारी रिलायंस इंडस्ट्रीज के परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे। ये परिणाम शुक्रवार को कारोबार बंद होने के बाद जारी हुए हैं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम का भी बाजार पर कुछ असर रहेगा।

उन्होंने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई और सेवा क्षेत्र का पीएमआई क्रमश: तीन मई और पांच मई को जारी होगा। इसके साथ ही, ”कोविड- 19 को लेकर ताजा स्थिति, टीका करण और वैश्विक संकेतों पर भी बाजार की नजर रहेगी। 

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बड़ी कंपनियों के परिणाम पर रहेगी नजर

सप्ताह के दौरान कोटक महिन्द्रा बैंक, हीरो मोटो कार्प, टाटा स्टील, डाबर और एचडीएफसी जैसे बड़ी कंपनियों के परिणाम घोषित होंगे। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को मार्च तिमाही के दौरान अपना मुनाफा दोगुने से भी अधिक होने की जानकारी दी है। उसके खुदरा और दूरसंचार तथा पेट्रोरसायन कारोबार में सुधार हुआ है जिससे रिफाइनिंग कारोबार की कमजोरी दब गई।  इसके अलावा सपताह के दौरान अदाणी पोर्टस एण्ड स्पेशिल इकोनामिक जोन, अदाणी एंटरप्राइजेज, सीएट और अदाणी पावर के भी सप्ताह के दौरान नतीजे घोषित होंगे। 

विदेशी निवेशकों ने 9,659 करोड़ रुपए निकाले

विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजारों में छह महीने से जारी खरीददारी का दौर अप्रैल में थम गया। विदेशी निवेशक अप्रैल माह में शुद्ध बिकवाल रहे और माह के दौरान उन्होंने भारतीय शेयर बाजारों से 9,659 करोड़ रुपए की निकासी की। भारत में कोरोना वायरस की गंभीर लहर और उसके अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने अपना यह रुख बदला।

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माईवेल्थग्रोथ.कॉम के सह संस्थापक हर्षद चेतनवाला के अनुसार विदेशी निवेशकों में कोविड-19 संकट का भय यदि बढ़ता है तो विदेशी निवेशकों के अपनी हिस्सेदारी बेचने का चलन जोर पकड़ सकता है और बाजार में थोड़ी और उथल-पुथल आ सकती है। डिपॉजिटरी के पास मौजूद आंकड़े के मुताबिक पिछले महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय इक्विटी बाजार से 9,659 करोड़ रुपए की पूंजी निकाली। सितंबर, 2020 के बाद से पहली बार इस स्तर पर पूंजी की निकासी की गई। तब 7,782 करोड़ रुपए की निकासी की गई थी।